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July to September 2026 Article ID: NSS10002 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.10002 View PDf
भारतीय संघवाद के विकास में न्यायपालिका की भूमिका: प्रमुख संवैधानिक निर्णयों का विश्लेषण
अभिषेक कुमार
शोधार्थी (राजनीति विज्ञान) जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा (सारण) (बिहार)
शोध सारांश- भारतीय संघवाद की संरचना संविधान
द्वारा संघ और राज्यों के बीच विधायी, कार्यपालिका तथा वित्तीय शक्तियों के वितरण पर आधारित है।
यद्यपि भारतीय संविधान में संघ को अपेक्षाकृत अधिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, फिर
भी राज्यों को संवैधानिक रूप से निर्धारित क्षेत्रों में स्वायत्त शासन का अधिकार
प्राप्त है। इस संघीय व्यवस्था के संतुलन को बनाए रखने में न्यायपालिका, विशेषकर
सर्वोच्च न्यायालय,
की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। भारतीय संघवाद का विकास केवल संवैधानिक
प्रावधानों और राजनीतिक व्यवहार से नहीं हुआ, बल्कि
न्यायिक व्याख्याओं ने भी इसके स्वरूप और सीमाओं को निरंतर प्रभावित किया है।
सर्वोच्च न्यायालय नेकेशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, मिनर्वा
मिल्स बनाम भारत संघ,
एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ, नबाम रेबिया
बनाम उपाध्यक्ष,
तथाGovernment
of NCT of Delhi v. Union of Indiaजैसे मामलों में संविधान की
सर्वोच्चता,
न्यायिक समीक्षा,
संघवाद,
लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व और राज्यीय स्वायत्तता से संबंधित महत्वपूर्ण
सिद्धांत विकसित किए हैं।
यह शोध-पत्र भारतीय संघवाद के विकास में न्यायपालिका की
भूमिका का संवैधानिक एवं न्यायिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य तर्क
यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक ओर संविधान में निहित संघीय शक्तियों के विभाजन
की रक्षा की है,
वहीं दूसरी ओर भारतीय संविधान की केंद्रीकृत विशेषताओं को भी स्वीकार किया है।
इसलिए न्यायपालिका की भूमिका को केवल “राज्यों के अधिकारों की रक्षक” के रूप में
देखना पर्याप्त नहीं होगा। न्यायिक दृष्टिकोण में राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक
सर्वोच्चता,
लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व और संघीय संतुलन के बीच समन्वय स्थापित करने का
प्रयास दिखाई देता है। समकालीन मामलों में यह भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है
क्योंकि संघ–राज्य संबंध अब केवल विधायी अधिकारों तक सीमित न रहकर राज्यपाल की
भूमिका, प्रशासनिक
नियंत्रण,
कराधान,
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली तक विस्तृत
हो चुके हैं।
शब्द कुंजी-भारतीय संघवाद, न्यायपालिका, सर्वोच्च न्यायालय, राज्य स्वायत्तता, संघ–राज्य संबंध, न्यायिक समीक्षा, अनुच्छेद 356, मूल संरचना, संवैधानिक संघवाद।
