• April to June 2026 Article ID: NSS10004 Impact Factor:8.05 Cite Score:5 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    निर्मल वर्मा की कहानियों में मध्यवर्गीय संवेदना : स्वरूप, अंतर्द्वंद्व एवं अभिव्यक्ति

      कविता
        शोधार्थी, ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय, जयपुर (राज.)
      डॉ. भावना
        शोध निर्देशिका, ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय, जयपुर (राज.)

शोध सारांश- हिंदी की नई कहानी के प्रमुख हस्ताक्षरों में निर्मल वर्मा का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उनकी कहानियाँ आधुनिक मनुष्य के आंतरिक जीवन, अकेलेपन, भावनात्मक रिक्तता, संबंधों के विघटन, अस्तित्वगत संकट तथा मध्यवर्गीय जीवन की जटिल संवेदनाओं को सूक्ष्मता के साथ अभिव्यक्त करती हैं। निर्मल वर्मा के कथा-साहित्य में मध्यवर्ग केवल आर्थिक स्थिति से निर्धारित कोई सामाजिक वर्ग नहीं है, बल्कि वह एक ऐसी मानसिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें व्यक्ति परंपरा और आधुनिकता, आकांक्षा और उपलब्धि, स्वतंत्रता और सामाजिक दायित्व तथा आत्मीयता और अलगाव के बीच निरंतर संघर्ष करता रहता है।

प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य निर्मल वर्मा की प्रमुख कहानियों के माध्यम से मध्यवर्गीय संवेदना के विविध पक्षों का विश्लेषण करना है। इस अध्ययन में परिंदे, लंदन की एक रात, डेढ़ इंच ऊपर, जलती झाड़ी तथा पिछली गर्मियों में जैसी कहानियों को आधार बनाकर आधुनिक मध्यवर्गीय जीवन की मनःस्थितियों, संबंधगत जटिलताओं, स्मृति, प्रेम, असुरक्षा और अस्तित्वगत अकेलेपन का विवेचन किया गया है। शोध में पाठ-विश्लेषण, मनोवैज्ञानिक व्याख्या तथा सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण का सहारा लिया गया है। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि निर्मल वर्मा मध्यवर्गीय जीवन की बाहरी घटनाओं की अपेक्षा उसके भीतर घटित होने वाली सूक्ष्म मानसिक प्रक्रियाओं को अधिक महत्त्व देते हैं। उनकी कहानियाँ आधुनिक मध्यवर्ग की संवेदनात्मक विडंबनाओं का कलात्मक दस्तावेज प्रस्तुत करती हैं।

शब्द कुंजी-निर्मल वर्मा, मध्यवर्गीय संवेदना, नई कहानी, आधुनिकता, अकेलापन, संबंध-विघटन, मनोवैज्ञानिक यथार्थ, अस्तित्व-बोध।