• January to March 2024 Article ID: NSS8483 Impact Factor:7.60 Cite Score:660 Download: 34 DOI: https://doi.org/29 View PDf

    भारत में पर्यटन उद्योग से आर्थिक विकास: एक अध्ययन

      डाॅ.राम सिंह धुर्वे
        सहायक प्राध्यापक (भूगोल) शासकीय स्नातक महाविद्यालय, नैनपुर, जिला-मण्डला (म.प्र.) भारत
  • प्रस्तावना- अनेक महत्वपूर्ण स्थल देखने तथा मन बहलाव के लिए अधिक विस्तृत भू-भाग में किया जाने वाला भ्रमण पर्यटन कहलाता है। पर्यटन ही एक ऐसा उद्योग है जिससे प्रत्येक राष्ट्र की धार्मिक, ऐतिहासिक, साँस्कृतिक और सामाजिक विकास की क्रियाएँ आबद्ध हैं। पर्यटन का निरंतर विकास करके आधारभूत संरचना का विकास संभव हो सकता है। पर्यटन के माध्यम से राष्ट्रीय कोष में दुर्लभ विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है, साथ ही रोजगार के नये अवसर भी सृजित होते हैं। पर्यटन गरीबी दूर करने और मानव विकास के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरा है। रोजगार के साधन जुटाने में इसका योगदान बहुत ज्यादा है। पर्यटन से राष्ट्रीय एकता और अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा मिलता है तथा हस्तशिल्प और साँस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।

        देश के पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था का समावेशी विकास किया जा सकता है। पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार और अर्थव्यवस्था की प्रगति की प्रचुर संभावनाएँ हैं, इस समय पर्यटन क्षेत्र में विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में तीन गुणा अधिक रोजगार उपलब्ध है। पर्यटन उद्योग में पिछले वर्षों में लगभग पाँच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है जबकि विनिर्माण क्षेत्र में तीन फीसदी से भी कम की वृद्धि हुई है। प्रत्येक मनुष्य की प्राकृतिक इच्छा, एक दूसरे की संस्कृति और मूल्यों को समझने के लिए तथा अन्य सामाजिक, धार्मिक और व्यवसायिक हितों की पूर्ति के लिए पर्यटन के मूल संरचना विकास हुआ है। यह देश के विभिन्न प्रदेशों और देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य को सुगम बनाया है इसी कारण यह सेवा उद्योग का उभरा है।