• January to March 2024 Article ID: NSS8499 Impact Factor:7.60 Cite Score:1033 Download: 44 DOI: https://doi.org/51 View PDf

    पर्यावरण संकट और आपदा प्रबंधन

      डाॅ. रितु उमाहिया
        सहायक प्राध्यापक, विधि महाविद्यालय, गुना (म.प्र.)
  • शब्द कुंजी-पर्यावरण, आपदा, आपदा प्रबंधन, भूकंप, बाढ़, बादलों का फटना।

    प्रस्तावना-  पर्यावरण की संकल्पना भारतीय संस्कृति में सदैव प्रकृति से की गई है, जहाँ समस्त जीवधारी, प्राणियों और निर्जीव पदार्थों में सदा एक दूसरे पर निर्भरता व समन्वय की स्थिति रही है। पर्यावरण में अनेक जैविक व अजैविक कारक पाये जाते हैं जिनका परस्पर गहरा संबंध होता है। प्रत्येक जीव को जीवन के लिए वायु, जल, ऊर्जा की एक उचित मात्रा की आवश्यकता होती है। जब तक जैविक एवं अजैविक घटकों की उचित मात्रा प्रकृति में विद्यमान रहती है, तब तक प्रकृति में संतुलन बना रहता है, किन्तु वर्तमान में मनुष्य ने विकास के लिये इन अजीब कारकों का अंधाधुंध प्रयोग कर पर्यावरण का संतुलन बिगाङ कर उसे प्रदूषित कर दिया है।

                पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा-2(क) में पर्यावरण को परिभाषित किया गया है जिसके अनुसार ‘पर्यावरण में जल, वायु तथा भूमि तथा जल और वायु तथा मानवीय प्राणी, अन्य जीवजंतु, पौधे, सूक्ष्म जीवाणु तथा संपत्ति में और उनके मध्य विद्यमान अन्र्तसम्बंध सम्मिलित हैं।चैम्बर डिक्शनरी के अनुसार पर्यावरण से तात्पर्य विकास या वृद्धि को प्रभावित करने वाली परिस्थितियाँ हैं। ऑक्सफाॅर्ड स्टैन्डर्ड डिक्शनरी के अनुसार, पर्यावरण का अर्थ आसपास की वस्तु स्थिति परिस्थितियाँ या प्रभाव है।