• January to March 2024 Article ID: NSS8555 Impact Factor:7.60 Cite Score:1368 Download: 51 DOI: https://doi.org/ View PDf

    प्रभावी शिक्षण के लिए, शिक्षा शास्त्र के रूप में सूचना एवं संचार तकनीकी प्रौद्योगिकी

      डॉ. मिताली बजाज
        सहायक प्राध्यापक, महाराजा काॅलेज, उज्जैन (म.प्र.)
      बलजीत सिंह
        शोधार्थी, महाराजा काॅलेज, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)
  • प्रस्तावना- मुख्यतः सूचना, तकनीक तथा विज्ञान के बढ़ते अनुप्रयोग, पहले से अधिक कार्यकुशलता तथा अधिक तेजी से किसी भी कार्य को सम्पन्न करने में, महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने में सहायक सिद्ध हुआ है।

        प्राचीन काल में, मानव संसाधन तथा तकनीकी खोजों के अभाव में, किसी भी कार्य में कार्यकुशलता का कोई मापन या पैमाना ना होने से इसमें क्या फैक्टर्स प्रभावी रहे। इसका काई सामान्य या विशिष्ट लक्ष्य नहीं था। कृषि, उद्योग उत्पादन में, जितना भी प्राकृतिक रूप से, प्राप्त होता था, उससे प्रयोग में लाया जाता था। उत्पादन तथा उपभोग के बीच के अन्तर को पूरा करने का कोई लक्ष्य नहीं था। समय के साथ-साथ जनसंख्या वृद्धि, उत्पादन तथा उपभोग के बीच अन्तर को पाटना तथा अधिक से अधिक लाभ, उत्पादन, गुणवता आदि पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा।