• January to March 2024 Article ID: NSS8623 Impact Factor:7.67 Cite Score:753866 Download: 1227 DOI: https://doi.org/ View PDf

    वागड़ क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल एवं पर्यटन

      प्रकाश यादव
        शोधार्थी़ (इतिहास) गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा (राज.)

प्रस्तावना - अतीत के अध्ययन से मानवीय जीवन मे कई तथ्यों एवं साक्ष्यों की परख के पश्चात् पूर्व कालीन संस्कृति की परम्परा को अपने हृदय पटल पर संजोये रखा है, और इसी के चलते सांस्कृतिक विरासत ने मानव को सम्मान व आत्म-सम्मान प्राप्त करने में सहायता प्रदान की है। विरासत में मिली ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों, प्राचीन स्मारकों, सांस्कृतिक परिवेश ने आज हमें कथाओं, पौराणिक कथाओं, दंत कथाओं, शास्त्रों के माध्यम से त्याग, बलिदान, आस्था, श्रृद्धा और गौरवमयी इतिहास का निर्वहन करने में सदैव मार्गदर्शन दिया है। यह विषय सम्पूर्ण रूप से सम्मिलित भी कर लिया जाये तो उनमें नैतिकता की झलक देखने को मिलती है । अतिथि देवो भवः  की यह परम्परा हमारे जहन में सदैव जीवित रहती है और यह हमने इतिहास से ही प्राप्त की है । इतिहास और पर्यटन का स्वरूप एक दूसरे पर पूर्ण रूप से निर्भर है। यदि किसी एक को अलग कर दिया जाये तो इसका स्वरूप और महत्व ही समाप्त हो जाएगा। इतिहास के बिना पर्यटन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है । पर्यटन इतिहास के आँचल में पनप कर प्रफुल्लित हो रहा है।