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April to June 2024 Article ID: NSS8675 Impact Factor:8.05 Cite Score:7882 Download: 124 DOI: https://doi.org/ View PDf
धर्म नैतिकता और गांधी दर्शन
डॉ. नितीश ओबेराइन
सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) श्री राजीव गांधी शासकीय महाविद्यालय, बण्डा, जिला-सागर (म.प्र.)
प्रस्तावना- गांधीजी के सिद्धांतों,
विचारों और मंतव्यो का समूहीकरण गांधी दर्शन कहलाता है। सरल शब्दों में गांधी के वे
सिद्धांत जिन्हे हम प्रतिदिन अपने जीवन में महसूस करते है जैसे सत्य, धर्म, शांति,
अहिंसा, प्रेम, संयम, विश्वास, भलाई, कृपा नम्रता, सत्याग्रह, सविनय, ब्रह्चर्य, अस्तेय,
धीरज, मेल एवं रोटी के लिए श्रम।
गांधी के ये विचार मानव के जीवन को नई दिशा देने में सक्षम
है। मानव जाति इन सरल शब्दों में छिपे हुए गूढ़ अर्थ को समझती है अथवा हनी? गांधीजी
ने विश्व के विभिन्न प्रमुख धर्मों का सूक्ष्म अध्ययन किया। वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे
कि सूर्व साधारण में धर्म की जो अवधारणा प्रचलित है वह नितांत भ्रामक है इसलिए उन्होने
अपने प्रयोगों और निष्कर्षों के आधार पर धर्म की पुनः व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होने
धर्म को जीवन का आधारभूत तत्व बताया। उन्होंने कहा-‘‘धर्म से मेरा अभिप्राय औपचारिक
या रूढ़िगत धर्म से नही परन्तु उस धर्म से है जो सब धर्मों की बुनियाद है और जो हमें
अपने सृजनहार का साक्षात्कार कराता है.....।’’