-
October to December 2024 Article ID: NSS8806 Impact Factor:8.05 Cite Score:67156 Download: 365 DOI: https://doi.org/ View PDf
मेघदूत में प्रयुक्त दार्शनिक तत्त्व
डॉ. गरिमा शर्मा
सहायक आचार्य (विद्या संबल योजना के तहत), राजकीय कन्या महाविद्यालय, राजसमन्द (राज.)
प्रस्तावना-देववाणी के सनातन शृंगार
महाकवि कालिदास संस्कृत वाङ्मय के रससिद्ध कवीश्वर हैं। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति
का प्रधान संवाहक होता है, अतएव साहित्य में किसी भी देश की संस्कृति का प्रतिबिम्ब
होना नितान्त स्वाभाविक है । संस्कृति के समुचित प्रसार एवं प्रचार के दृष्टिकोण से
महाकवि का समग्र काव्य अखण्ड शिव सन्देश है। लोक कल्याण एवं राष्ट्रमंगल की मधुमय पयस्विनी
प्रवाहित करने वाले ऐसे महान क्रान्तदर्शी मनीषी कवि की कृतियों में संस्कृति के प्राणभूत
आध्यात्मिक तत्त्वों का सागर है। ’दर्शन’ भारतीय मनीषियों
की आत्मनिधि है, महामनीषी कालिदास का काव्य भी तत्त्वपर्येषणा से युक्त है।
