• October to December 2024 Article ID: NSS8925 Impact Factor:8.05 Cite Score:464 Download: 29 DOI: https://doi.org/ View PDf

    महाराव सिरोही एवं मेवाड़ महाराणा मुगल बादशाह अकबर के विरुद्ध

      भरत कुमार माली
        शोधार्थी (इतिहास) मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
  • प्रस्तावना- महाराव उदयसिंह की 10 रानियाँ थी लेकिन उनकी निःसंतान मृत्यु के बाद एकमात्र व्यक्ति मानसिंह दूदावत था जो इस समय मेवाड़ के कुम्भलगढ़ में महाराणा उदयसिंह के साथ था। महाराणा उदयसिंह कुंवर मानसिंह की वीरता बहादूरी से बहुत खुश थे तथा शिकार में मानसिंह द्वारा शौर्य व श्रेष्ठता बताने पर हमेशा शिकार के समय अपने साथ रखते थे। शिकार के सिलसिले में महाराणा उदयसिंह तथा कुंवर मानसिंह कुम्भलगढ़ आये थे। इसी समय सिरोही मेवाड़ महाराव उदयसिंह का देहान्त हो गया तब सिरोही वालों ने सोचा की अगर मेवाड़ महाराणा के महाराव उदयसिंह के निःसंतान मृत्यु की जानकारी मिली तो वे यहाँ आक्रमण कर देगे और आबू-सिरोही क्षेत्र पुनः मेवाड़ के पास चला जायेगा। अतः सभी बातों को देखकर मानसिंह को जानकारी देने तथा उसे अतिशीघ्र सिरेाही बुलाने हेतु भरोसेमन्द व्यक्ति जयमल साघणी को नियुक्त किया जो रात्रि के समय सिरोही से निकला और सुबह कुम्भलगढ़ पहुँच गया। कुम्भलगढ़ पर पहुँचा तब मानसिंह महाराणा के साथ कुम्भलगढ़ दुर्ग पर था। अतः जयमल साहाणी ने सम्पूर्ण घटनाक्रम मानसिंह के डेरे पर चीबा सावंत सी (सामंतसिंह) से कहा। वहाँ से जयमल साहाणी किले पर गया जिसको देखकर मानसिंह समझ गया की सिरोही में कुछ अप्रिय घटना हुई है। मानसिंह वहाँ से डेरे पर आया और चीबा सामन्त जी को बोला कि में 4-5 सवारों के साथ सिरोही की तरफ जा रहा हूँ और महाराणा के यहाँ से कोई आये तो बोलना कि मैंने दो सुअर देखे है जिसके शिकार के लिए गया हूँ।