• January to March 2025 Article ID: NSS8951 Impact Factor:8.05 Cite Score:80 Download: 11 DOI: https://doi.org/ View PDf

    राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में बालिका नामांकन एक अध्ययन (जोधपुर जिले के संदर्भ में)

      डॉ. नीति चैहान
        सहायक प्रोफेसर (शिक्षा) चोपासनी महाविद्यालय, चोपासनी, जोधपुर (राज.)
  • शोध सारांश-  किसी भी राष्ट्र के विकास में उच्च शिक्षा अपनी अहम भूमिका अदा करती है क्योंकि व्यक्ति को उसके ज्ञान, संश्लेषण, विश्लेषण, आलोचनात्मक चिन्तन के विकास, दृष्टिकोण व कार्यकरने के ढंग में उच्चता की ओर अग्रसर करती है। भारत में माध्यमिक शिक्षा पर विचार करने पर ध्यान स्वतः ही राष्ट्र की प्रजातंात्रिक व्यवस्था की ओर आकृष्ट हो जाता है। जहां सभी नागरिक समान है, और सभी को अपनी योग्यतानुसार कार्य करने तथा शिक्षा के अवसर प्राप्त होने चाहिए। वहीं दूसरी ओर हमारा ध्यान ऐसे वर्गों पर भी जाता है। जो किन्हीं कारणों से महत्वाकांक्षी होते हुए भी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। जिनमें से ‘बालिका भी एक ऐसा ही वंचित वर्ग है जो चाहते हुए भी अपनी विभिन्न समस्याओं के कारण माध्यमिक शिक्षा से वंचित है। अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक कारणों के साथ-साथ विद्यालयों की न्यूनता अथवा दूरी, बालिका विद्यालयों की कमी/अनुपलब्धता भी माध्यमिक शिक्षा में बालिकाओं की पहुँच में बाधक रही है। अब यद्यपि सरकारी, अनुदानित एवं गैर सरकारी विद्यालयों की बढ़ी संख्या ने विद्यालयी शिक्षा में बालिका सहभागिता पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। किन्तु अब भी बालिकाओं की अपेक्षित जनसंख्या माध्यमिक शिक्षा का लाभ नहीं उठा पा रही है, किन्तु अब उनके समक्ष खुली-शिक्षा व्यवस्था का विकल्प आने से माध्यमिक शिक्षा में उनकी सहभागिता में सुधार नितान्त अपेक्षित है। यह ज्ञातव्य है कि खुली शिक्षा-प्रणाली में समय, स्थान, आयु एवं जाति सम्बन्धी कोई सीमा नहीं रखी गई तथा उसे अधिक लचीली एवं व्यावहारिक बनाने की कोशिश की गई है। खुली शिक्षा द्वारा ऐसे व्यक्तियों को शिक्षित करने की बात की गई है जो किन्हीं व्यक्तिगत अथवा सामाजिक कारणों से विद्यालय नहीं जा पाते, अथवा बीच में ही विद्यालय त्याग कर देते है। ऐसे ही व्यक्तियों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु विद्यालय स्तर पर सत्र 1989 में राष्ट्रीय खुला विद्यालय की स्थापना की गई।

    शब्द कुंजी-सांस्कृतिक, प्रजातंत्रिक व्यवस्था।