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January to March 2025 Article ID: NSS8959 Impact Factor:8.05 Cite Score:130 Download: 14 DOI: https://doi.org/ View PDf
पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवैधानिक दृष्टिकोण
विजय लक्ष्मी जोशी
सहायक प्राध्यापक, शासकिय विधि महाविद्यालय, शाजापुर (म.प्र.)
शोध सारांश- पर्यावरण और प्राणी एक दूसरे पर आश्रित है। यही कारण हैं कि भारतीय चिंतन में पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा उतनी ही प्राचीन हैं जितना मानव जाति का ईतिहास। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के महत्व को समझने के लिए इसे प्राचीन काल से ही जीवन दर्शन के साथ पिरोह कर रखा गया हैं। भारतीय वेदों ने प्राकृतिक शक्तियों को देवी देवताओं का रूप देकर पर्यावरण संरक्षण को ऊँचा दर्जा दिया है। हमारें यहाँ शास्त्रों में कहा गया हैं-
यावत् भूमंडलं धत्ते, सशैलवन काननम्।
तावत्तिष्ठति में दिन्यां संततिः पुत्र पौत्रिकी।।
अर्थात् जब तक धरती पर पर्वत और हरे-भरे वन रहेंगं, तब तक हम और हमारी भावी पीढियाॅ जीवित और खुशहाल रहेगी। आधुनिक जीवन शैली और वैश्वीकरण ने पर्यावरण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है। औधोगीकरण के कारण पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा हैं, पर्यावरण प्रदूषण से निपटने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए कई कानून बनाए जा चुके है, किन्तु प्रस्तुत शोध पत्र में उनका वर्णन न करके केवल भारतीय संविधान द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रावधानों का संक्षिप्त में वर्णन कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवैधानिक दृष्टिकोण को समझाया गया है।
शब्द कुंजी- पर्यावरण, पर्यावरण संरक्षण,
भारतीय संविधान।














