• January to March 2025 Article ID: NSS8976 Impact Factor:8.05 Cite Score:118 Download: 14 DOI: https://doi.org/ View PDf

    भारतीय इतिहास में भक्तिकालीन संत पीपाजी का जीवन एवं कृतित्व एक अध्ययन

      डॉ. ओमप्रकाश गेहलोत
        सहायक प्राध्यापक (इतिहास) शासकीय महाविद्यालय, शामगढ़, जिला मंदसौर (म.प्र.)
  • प्रस्तावना-राव पीपा, जो बप्पा के नाम से भी उच्चारित किये जाते थे। ये बड़े ही प्रसिद्ध शासक रहे है और उनकी प्रसिद्धी का कारण उनका शासक होना नही है, इसका कारण उनके द्वारा राज्य का त्याग कर संत प्रवृत्ति को अपनाना रहा था। राव पीपा सन् 1360 ई. में गद्दी पर बैठे। इनका आरंभिक नाम प्रतापराव खींची था। संत बनने के पश्चात् संत पीपा के नाम से प्रसिद्ध हुए, ये कढ़वाराव के पुत्र थे। कड़वाराव के अन्य पुत्रों में भजनसिंह, चाचदेव व मलयसिंह का नाम आता है। इनमें से मलयसिंह ने मालवा में राघोगढ़ का राज्य स्थापित किया, मलयसिंह ने राघोगढ़ से शेरगढ़ लेकर अपने राज्य राघोगढ़ की स्थापना की एवं राघोगढ़ का स्वतंत्र राज्य अस्तित्व में आया।