• January to March 2025 Article ID: NSS8980 Impact Factor:8.05 Cite Score:220 Download: 19 DOI: https://doi.org/ View PDf

    लिंगीय असमानता और चुनौतियां

      डॉ. पिंकी सोमकुवर
        सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) शासकीय आदर्श महाविद्यालय, उमरिया (म.प्र.)
  • शोध सारांश - लैंगिक असमानता एक सामाजिक धारणा है। स्त्री और पुरुष एक जैविक तथ्य है यदि इस तथ्य के साथ किसी प्रकार की असमानता जुड़ जाती  है तो यह एक लैंगिक असमानता का रूप ले लेती है। जेंडर एक सामाजिक सांस्कृतिक तथ्य हैं। प्रकृति मे किसी भी प्रकार का भेदभाव लिंग आधारित नहीं होता है। परंतु फिर भी समाज में महिलाओं के साथ प्रत्येक क्षेत्र में भेदभाव होता है-जैसे सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, खेल, मनोरंजन, शिक्षा तथा रोजगार आदि। लिंग असमानता की वजह से महिलाओं को कन्या भ्रूण हत्या, दहेज, घरेलू हिंसा, आर्थिक शोषण, अवसरों की असमानता आदि का सामना करना पड़ता है। और जब यह महिलाएं निम्न जाति से आती है तो उनका शोषण और बढ़ जाता है। अधिकांश धार्मिक कृत्य महिलाओं के हिस्से में आते हैं परंतु जहां संस्कारों की बात हो तो उच्च जातियों में पुरुषों का तो उपनयन संस्कार होता है परंतु महिलाओं का नहीं।  आज भी किसी मृत व्यक्ति को अग्नि देने का काम अधिकांशतः पुरुष ही करते हैं बहुत कम मामलों में महिलाओं को इस प्रकार के संस्कार करते हुए देखा जाता है। महिलाओं का समाजिकरण इस प्रकार होता है कि सारे व्रत की जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है चाहे वह पति के लिए हो या पुत्र के लिए । देवदासी, नगरवधू इस प्रकार की प्रथाएं भी महिलाओं को धर्म के माध्यम से समाज द्वारा ही दी जाती थी। लैगिक असमानता हमें मॉडर्न कल्चर लिव इन रिलेशनशिप में भी देखने के लिए मिलती है। श्रद्धा वाल्कर, निकी यादव यह हमारा ध्यान आकर्षित करती है। पुरुष का चुनाव आप अपनी मर्जी से करें या परिवार की मर्जी से हो आपको हिंसा का सामना इसमें भी करना पड़ सकता है।

    शब्द कुंजी-लिंग असमानता, समानता, अवसर, शिक्षा, शोषण, सामाजिकरण।