• January to March 2025 Article ID: NSS8996 Impact Factor:8.05 Cite Score:64 Download: 9 DOI: https://doi.org/ View PDf

    ई.एम.आई. चार्वाक दर्शन और मानव जीवन ( सुभाषनगर, सागर के संदर्भ में)

      प्रिया ठाकुर
        छात्र, बीए तृतीय वर्ष, शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर (म.प्र.)
      डॉ. सुनील साहू
        सहायक प्राध्यापक (अर्थशास्त्र) शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर (म.प्र.)
  • शोध सारांश- ई.एम.आई. का उपयोग आजकल एक आम सी बात हो गई है फिर चाहे वह एक मोबाईल फोन के लिए किए गए ई.एम.आई. के उपयोग से नाता रखता हो या चाहे बड़े-बड़े वाहनों और मशीनों के लिए ई.एम.आई. के उपयोग की बात हो एक व्यक्ति किसी ऋण और साथ ही किसी वस्तु के लिए ई.एम.आई. का उपयोग करता है ई.एम.आई. के उपयोग में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी प्रबल भागीदारी देखने में सामने आई है। ई.एम.आई.के द्वारा व्यक्ति अपनी कम आय में भी अपनी सभीआवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। चार्वाक दर्शन तीन नास्तिक दर्शनों में से प्रमुख नास्तिक दर्शन है। जो वर्तमान जीवन में सुख को महत्व देता है। ईसका मानना है कि भविष्य की अनिश्चितओं के बजाय वर्तमान में सुख का अनुभव करना चाहिए। ईस शोध पत्र में ई.एम.आई. सुविधा का उपयोग कर रहे व्यक्तियों के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर होने वाले प्रभावों का अध्ययन किया गया है । मासिक आय के आधार पर₹10000 - 20000 तक वेतन पाने वाले लोगों में अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ई.एम.आई. के उपयोग की प्रवृत्ति अधिक देखी गई लगभग 73.3प्रतिशतलोगों द्वारा वाहन केलिएई.एम.आई. का उपयोग किया जा रहा है जबकि 16.7प्रतिशत लोगों द्वारा किसी ऋण के लिए ई.एम.आई. की किस्त भरी जाती है। शोध पत्र में ई.एम.आई. सुविधा का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की समस्याएं व सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

    शब्द कुंजी- ई.एम.आई. , चार्वाक दर्शन, मानव जीवन, ऋण।