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January to March 2025 Article ID: NSS9012 Impact Factor:8.05 Cite Score:12 Download: 3 DOI: https://doi.org/ View PDf
21वीं सदी का भारत और गांधीवाद
डॉ. नीरज कुमार
सहायक प्राध्यापक (राजनीतिशास्त्र) शासकीय महाविद्यालय बिछुआ, जिला छिंदवाड़ा (म.प्र.)
शोध सारांश- महात्मा गांधी ने आजादी से पहले जिन समस्याओं पर विचार किया था और जो समाधान सुझाया था उनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है और आगे भी बने रहने की पूरी संभावना है क्योंकि वे विशेषकर भारत के संबंध में गहरी समझ और नैतिकता पर आधारित रहे है।चाहे भारत के आर्थिक विकास और बढ़ती अमीरी के बीच संपत्ति के असंतुलित वितरण का सवाल हो या मशीनीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रयोग से विशाल जनसंख्या के रोजगार का सवाल, अति उपभोक्तावाद की ओर बढ़ते कदम और पर्यावरण की समस्या, हिंसा का बढ़ता स्तर, विरोध के शांतिपूर्ण संसाधनों की आवश्यकता और विश्व गुरु बनने तथा वसुधैव कुटुंबकम को चरितार्थ करने के लिए उनके विचार नये भारत में भी प्रासंगिक रहेंगे। महात्मा गांधी के शिष्यों ने संविधान और सरकारी योजनाओं में उनके विचारों को अपेक्षा से बहुत कम स्थान दिया। वर्तमान केन्द्र सरकार जो महात्मा गांधी के विचारों का समर्थक नहीं रही है वह अपनी कई स्कीमों और योजनाओं में महात्मा गांधी के विचारों का समर्थन करते दिखाई देती है।
शब्द कुंजी - उपभोक्तावाद, जनसंख्या, रोजगार, अहिंसा, असमानता।














