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January to March 2025 Article ID: NSS9016 Impact Factor:8.05 Cite Score:19 Download: 4 DOI: https://doi.org/ View PDf
भारतीय चित्रकला के वर्तमान आयाम व प्रो0 भगवती प्रकाश काम्बोज
कुलदीप कुमार
शोधार्थी (चित्रकला) जे0 के0 पी0 पीजी कॉलेज, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)डॉ. निशा गुप्ता
एसोसिएट प्रोफसर (चित्रकला) जे0 के0 पी0 पीजी कॉलेज, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)
शोध सारांश- चित्रकला का इतिहास उतना
ही पुराना है, जितना मानव सभ्यता का विकास। जैसे जैसे मानव का विकास हुआ वैसे -वैसे
उसकी कला भी विकसित होती गयी। कला का उदय मानव की सौन्दर्य भावना का परिचायक है। आधुनिक
कला विभिन्न आयामों के साथ पल्लवित एवं पुष्पित हो रही है। भारतीय चित्रकला के आधुनिक
युग का प्रारम्भ 20वीं सदी से माना जाता है। अवनीन्द्रनाथ ठाकुर भारतीय चित्रकला के
पुनरूद्धारक रूप में प्रतिष्ठित हुए। इन्होंने देशी-विदेशी शैलियों का अध्ययन किया।
नन्दलाल बसु अवनीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रिय शिष्यों में से एक रहे हैं, जिन्होंने जलरंग
व टेम्परा में ही प्रायः अपने चित्रों को बनाया है। कला और पहाड़ों के प्राकृतिक सौन्दर्य
के प्रति प्रो० काम्बोज का लगाव जन्मजात है। प्रो० भगवती प्रकाश काम्बोज का जन्म
15 अगस्त 1928 ई० में देहरादून में हुआ था। इनके पिता का नाम गौरीशंकर था। बचपन से
ही इनमें चित्रकला व प्राकृतिक सौन्दर्य के प्रति विशेष रूचि रही।














