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January to March 2025 Article ID: NSS9018 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 3 DOI: https://doi.org/ View PDf
शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के प्ररीक्षणार्थियो की उपलब्धि अभिप्रेरणा का सृजनात्मकता के संदर्भ में अध्ययन
राधा रानी गौतम
शोधार्थी (शिक्षा) पेसिफिक एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, उदयपुर (राज.)डॉ. खेल शंकर व्यास
डीन (शिक्षा) पेसिफिक विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
प्रस्तावना - शिक्षा जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति का एक सशक्त माध्यम है।यह व्यक्ति की नैसर्गिक प्रवृत्तियो का शोधन व मार्गी-करण कर उसे समाज का सक्रिय सदस्य बनाती है। ताकि वह अपने उत्तरदायित्वो का कुशलता पूर्वक निर्वहन कर सके। वर्तमान समय में शिक्षा के उद्देश्य बदल चुके हैं। आज शिक्षा का उद्देश्य न केवल पाठ्यक्रम संबंधी ज्ञान प्रदान करना है बल्कि सह-पाठ्यक्रम व सहगामी क्रियाओ संबंधी जानकारी प्रदान करना भी है, जो कि अनुभव आधारित होता है और इसके लिए विद्यार्थियों का सृजनशील होना आवश्यक है अतः आज शिक्षा का उद्देश्य बालकों को सृजनात्मक बनाने पर बल देता है इसलिए पाठ्यक्रम की रचना इस प्रकार करनी चाहिए ताकि विद्यार्थी अधिक सर्जनशील बन सके, क्योंकि एक सर्जनशील बालक ही अपने अनुभवों, कलाओं, ज्ञान व कौशलों के आधार पर स्वयं को जीवन की विपरीत परिस्थितियों में समायोजित करने की सामर्थ्य रखता है।
अतः आवश्यकता है कि हम बालक के अंदर सृजनात्मक संबंधित विभिन्न गुण जैसे - भावना प्रबंधन, संबंधित घटनाओं के मध्य संबंध बनाना, नवीन विचार उत्पन्न करना संसार में दिए हुए पैटर्न ढूंढना आदि गुणों का विकास कर सके यदि छात्र का बुद्धि स्तर बढ़ेगा तो स्वतः ही उसका प्रभाव उपलब्धि अभिप्रेरणा पर पड़ेगा।
शब्द कुंजी-शिक्षक, शिक्षण परिक्षण संस्थान,
उपलब्धि अभिप्रेरणा, सृजनात्मकता।














