• October to December 2024 Article ID: NSS9025 Impact Factor:8.05 Cite Score:4 Download: 1 DOI: https://doi.org/ View PDf

    कृषि उत्पादन और कृषि यंत्रिकरण (एक अध्ययन)

      डॉ. भावना भटनागर
        सहायक प्राध्यारपक (अर्थशास्त्रअ) पी.एम.सी.ओ.ई., शासकीय स्ना{तकोत्तर (स्वकशासी) महाविद्यालय, दतिया (म.प्र.)
  • शोध सारांश - अध्ययन में पाया गया है कि कृषि क्षेत्र में यंत्रीकरण में वृद्धि हुई है, जिससे कृषि कार्यों को समय पर और कुशलता से करने में मदद मिली है। इससे किसानों को उन्नत कृषि यंत्रों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला है, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हुई है। कृषि यंत्रीकरण ने खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने और आयात को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से गेहूं, चावल और अन्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है। इसके अलावा, यंत्रीकरण ने किसानों को व्यावसायिक फसलों में विविधता लाने और उनकी आय बढ़ाने में मदद की है। कृषि यंत्रीकरण के कारण, खेतों की जुताई और बुवाई समय पर होती है, सिंचाई बेहतर होती है, और उर्वरकों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से होता है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है।                         

        सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि कृषि यंत्रीकरण से कृषि भूमि का बेहतर उपयोग हुआ है, प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ा है, और भूमि की शीघ्र और गहरी जुताई संभव हुई है। इससे समय की बचत हुई है, भूमि में नमी का स्तर बेहतर बना रहता है, और बीज और रासायनिक खाद का समन्वय बेहतर हुआ है। कृषि यंत्रीकरण ने उन्नत बीजों के उपयोग को बढ़ावा दिया है, सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था की है, और बहुफसली खेती को प्रोत्साहित किया है, जिससे कृषि उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई है।

    शब्द कुंजी-कृषि यंत्रीकरण, कृषि उत्पादन, खाद्यान्न, सिंचाई, उर्वरक