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April to June 2025 Article ID: NSS9144 Impact Factor:8.05 Cite Score:127515 Download: 504 DOI: https://doi.org/ View PDf
प्रेमचंद की कहानियों में नारी अध्ययन
किरण ठाकुर
शोधार्थी (हिन्दी) स्कूल ऑफ आट्र्स एंड सोशल साइंस, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, बालाघाट (म.प्र.)डॉ. संध्या बिसेन
विभागाध्यक्ष (हिन्दी) स्कूल ऑफ आट्र्स एंड सोशल साइंस, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, बालाघाट (म.प्र.)
शोध सारांश- प्रेमचंद की कहानियाँ भारतीय जन की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व राजनीतिक परिस्थितियों को उजागर करती हैं। प्रेमचंद अपनी कहानियों में समाज के हर वर्ग के साथ नारी समस्याओं पर केवल चर्चा नहीं करते अपितु नारी के स्वतन्त्र होने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्रेमचंद नारी के अस्तित्व को सजग करनेके लिये स्वयं सजग होने की सलाह देते हैं। नारी जागरण की जोत जगाने के लिए, प्रेमचंद अपने लेखन से घर-घर नारियों को जागृत करते हैं। प्रेमचंद जी का वर्षोपहले अपने कहानियों के माध्यम से नारी के अस्तित्व और मूल्यों के लिये जो संघर्ष किया वहनव जागरण के इतिहास में बहुमूल्य योगदान हैं। इसी कारण प्रेमचंद का ‘‘नारी विमर्श’’ प्रासंगिक बना हुआ हैं।
शब्द कुंजी-प्रेमचंद, नारी विमर्श।
