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April to June 2024 Article ID: NSS9159 Impact Factor:8.05 Cite Score:44162 Download: 296 DOI: https://doi.org/ View PDf
बड़वानी जिले के परिप्रेक्ष्य में भारत छोड़ो आंदोलन
डॉ. मधुसूदन चैबे
सह-प्राध्यापक (इतिहास) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी (म.प्र.)
शोध सारांश- आधुनिक भारत के इतिहास में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध हुए भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्वपूर्ण स्थान है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के माध्यम से संचालित किये गये गय इस आंदोलन की घोषणा 8 अगस्त, 1942 को बॉम्बे में महात्मा गांधी ने की और ‘करो या मरो’ का संदेश दिया था। 9 अगस्त को प्रारंभ हुए इस आन्दोलन का प्रसार देश के प्रत्येक हिस्से में हुआ। इसमें वर्तमान बड़वानी जिला क्षेत्र भी सम्मिलित है। ऑपरेशन जीरो अवर के अंतर्गत अंग्रेजों ने अधिकांश बड़े राष्ट्रीय नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था, अतः यह स्वस्फूर्त जन आंदोलन में रूपांतरित हो गया।
बड़वानी जिला क्षेत्र में भी उस दौरान अनेक गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी सक्रिय रहे। स्वाधीनता आंदोलन में जनसहभागिता का यह एक प्रमुख उदाहरण है। इस क्षेत्र के संघर्षकर्ताओं के नाम आज़ादी की लड़ाई के राष्ट्रीय नायकों में शामिल नहीं हैं, जबकि इनका योगदान किसी भी दृष्टि से कम नहीं है। इन्होंने अंग्रेजों के अमानुशिक अत्याचार सहे हैं। यातनापूर्ण जेलयात्राएँ की हैं। बड़वानी जिला भारत छोड़ो आंदोलन का निमाड़ क्षेत्र में एक बड़ा केन्द्र रहा है।
इस शोध पत्र में बड़वानी जिले के परिप्रेक्ष्य में भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख आयामों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
शब्द कुंजी- आधुनिक भारत, साम्राज्यवाद,
उपनिवेशवाद, क्षेत्रीय नायक, निमाड़, जन-आंदोलन, ऑपरेशन जीरो अवर।
