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October to December 2024 Article ID: NSS9295 Impact Factor:8.05 Cite Score:8322 Download: 127 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9295 View PDf
बौद्ध धर्म से हिन्दू धर्म को बचाए रखने में ब्राह्मणों की भूमिका
डॉ. श्री कान्त मिश्र
सहा. प्रा. (इतिहास) शास. महा. मार्तण्ड महाविद्यालय, कोतमा (म.प्र.)
प्रस्तावना- अभी धर्मों पर पुरातन ब्राह्मण धर्म की स्पष्ट छाप है।
दोनों ही धर्मों ने थोड़े-बहुत परिवर्तनों
के साथ ब्राह्मण-धर्म के अनेक सिद्धांतों एवं कार्य-प्रणाली को ग्रहण किया है। ब्राह्मण-व्यवस्था
के अन्तर्गत भी धर्म की नैतिक व्याख्या की गई थी। जब हम महाभारतकार का यह कथन सुनते
हैं कि इन्द्रियों और मन का दमन ही मोक्ष है तो ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे स्वयं महात्मा
बुद्ध अथवा महावीर स्वामी ही उपदेश दे रहे हों। सत्यं वद, धर्मं चर स्वाध्यायान्मा
प्रमदः धर्मात्र प्रमदितव्यम्। कुशलान्न प्रमदितव्यम्, भूत्यै न प्रमदितव्यम्।’ इत्यादि
तैतिरीय उपनिषद् के शब्द क्या जैन एवं बौद्ध धर्मों के आचार-तत्व के समान ही नहीं हैं?
इसमें कोई सन्देह नहीं कि आचारवादी जैन और बौद्ध धर्मावलम्बियों ने इन आचार-तत्वों
को अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अधिक प्रयुक्त किया, कम-से-कम कुछ काल के लिए अवश्य
ही।
