• October to December 2024 Article ID: NSS9328 Impact Factor:8.05 Cite Score:11102 Download: 147 DOI: https://doi.org/ View PDf

    भारतीय राजनीतिक चिंतन में विरोध और शासक पर नियंत्रण : परंपरा, विमर्श और समकालीन प्रासंगिकता

      डॉ. शोभा गौतम
        सह आचार्य (राजनीति विज्ञान) से. मु .मा .राजकीय कन्या महाविद्यालय, भीलवाड़ा (राज.)

शोध सारांश -  प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में राजतंत्र की मान्यता को सहमति दिखाई देती है ।भारतीय राजनीतिक चिंतन राजतंत्र को सर्वश्रेष्ठ शासन मानते हुए भी जनता के कल्याण को प्राथमिकता देने के प्रति उदासीन नहीं रहा है, प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन चाहे वह मनुस्मृति हो, कौटिल्य का अर्थशास्त्र या शुक्र का शुक्र नीतिसार  सभी में राजतंत्र की प्रधानता होते हुए भी राजतंत्र को धर्म और नीति के अधीन रखा गया है ।प्रस्तुत शोध पत्र में प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में विरोध और शासन पर नियंत्रण की अवधारणा का समसामयिक परिपेक्ष में विश्लेषण किया गया है।

शब्द कुंजी-राजतंत्र,मनुस्मृति ,अर्थशास्त्र, विरोध।