• July to September 2025 Article ID: NSS9386 Impact Factor:8.05 Cite Score:14784 Download: 170 DOI: https://doi.org/ View PDf

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा राष्ट्रीय एकता अखण्डता से संबंधित प्रस्ताव (ई.सन 1950 से ई.सन् 2000 के विशेष संदर्भ में)

      रणधीर झा
        इंदिरा प्रियदर्शिनी महाविद्यालय, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)
      अन्नु झा
        इंदिरा प्रियदर्शिनी महाविद्यालय, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)
      जैमिनी खानवे
        इंदिरा प्रियदर्शिनी महाविद्यालय, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

शोध सारांश- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है जो संपूर्ण विश्व में अपने सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यों के लिये  जाना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नियमित गतिविधियों के अलावा वर्ष भर में किये जाने वाली, अन्य विशेष गतिविधियों के संचालन की कार्य-योजना का र्निधारण राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा एवं अखिल भारतीय केन्द्रीय कार्यकारी मंडल की बैठकों के माध्यम से किया जाता रहा है। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला या शीर्ष नीति निर्धारण करने वाला निकाय है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल एवं अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा जिन प्रस्तावों को पारित करता है, वह संघ के कार्यकर्ताओं के लिये पूरे वर्ष के दौरान, कार्य एवं विमर्श का विषय होता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उक्त कार्य योजना के अनुसार ही समाज को संगठित व जागरूक करने का कार्य करता है। हम कह सकते है कि, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ द्वारा पारित प्रस्ताव संघ की विचारधारा, राष्ट्र चिंतन, देश-सेवा का प्रतिबिम्ब होते है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ द्वारा ई. सन् 1950 से ई. सन् 2000 तक अनेक प्रस्ताव पारित किये गये, जिनमें से राष्ट्रीय एकता व अखण्डता के संदर्भ में पारित किये गये प्रस्ताव, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की दूर-दृष्टि का परिणाम है।

शब्द कुंजी-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आर.एस.एस, प्रस्ताव, संघ, अखिल भारतीय प्रतिनिधी सभा, राष्ट्रीय एकता, अखण्डता।