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April to June 2025 Article ID: NSS9423 Impact Factor:8.05 Cite Score:4105 Download: 89 DOI: https://doi.org/ View PDf
चित्रा मुद्गल के उपन्यासों में राजनीति और स्त्री का अंर्तसम्बन्ध
डॉ. आशा अग्रवाल
प्राध्यापक (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर (म.प्र.)बन्दना कुमारी
शोधार्थी (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर (म.प्र.)
प्रस्तावना- चित्रा जी एक संवेदनशील
एवं युग-दृष्टा साहित्यकार है। उनकी रचनाओं में सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों
का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। चित्रा जी ने अपने उपन्यासों में स्त्री जीवन
के विविध पक्षों का चित्रण किया है। उन्होंने स्त्री पर राजनीति के प्रभाव के साथ-साथ
राजनीति में स्त्रियों के उपयोग को अपने उपन्यासों में दर्शाया है। हमारे देश की स्वतंत्रता
के बाद स्त्रियों की राजनीतिक स्थिति में अच्छे बदलाव आए हैं। कई प्रकार के अधिनियम
बनाए गए हैं, जिससे उनकी स्थिति बेहतर हो सके। हमारे देश में अनेक स्त्रियों ने राजनीति
में अपनी पहचान बनाई है। चित्रा जी ने अपने उपन्यासों में ऐसे स्त्री पात्रों की रचना
की है, जो बदलाव लाने की ताकत बनकर राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके
साथ उन्होंने कुछ ऐसी स्त्री-पात्रों की भी रचना की है, जिनका उपयोग नेता अपने राजनीतिक
दल के लिए करते हैं। इस प्रकरण में उनका शोषण भी होता है।
