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    अहिल्याबाई का व्यक्तित्व एवं कृतित्व

      डॉ. कुन्ती वराठे
        सहा. प्राध्यापक. (इतिहास) शासकीय कला महाविद्यालय, बम्हनी बंजर, जिला-मण्डला (म.प्र.)

प्रस्तावना-  मालवा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1925 धनगर गायरी समाज में चैड़ी नामक गांव में हुआ था। जो कि अब महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के जामखेड में पड़ता है। उनके पिता मानकोजी शिंदे एक किसान परिवार से थे। अहिल्या बाई का विवाह इंदौर साम्राज्य के महाराजा मल्हार राव होल्कर के पुत्र खण्डेराव से हुआ था। उनका एक पुत्र मालेराव एवं पुत्री मुक्ताबाई थी। अहिल्या बाई लगभग उन्तीस वर्ष की आयु में विधवा हो गयी थी और उन्होंने सती होने का प्रण लिया कि जीवन जीने का कोई अर्थ नहीं है। तब उनके ससुर मल्हार राव ने समझाने का प्रयास किया और वे कार्य में सफल हुए अहिल्या ने सती होने का विचार को त्यागकर प्रजा की सेवा करने का उत्तरदायित संभाला। ‘‘बहुजन का हिताय बहुजन सुखाय’’ के मूल मंत्र को अपने जीवन मैं अपनाया उन्होंने राजसी ठाटबाट का त्याग कर दिया और अपना जीवन दुःखी पीड़ित लोगों की सेवा को सर्वश्रेष्ठ माना। 30 साल के शासनकाल के दौरान मराठा प्रांत की राजमाता अहिल्याबाई होल्कर ने एक छोटे से गाँव इंदौर को समृद्धशाली शहर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।