• April to June 2025 Article ID: NSS9656 Impact Factor:8.05 Cite Score:71 Download: 7 DOI: https://doi.org/ View PDf

    नमक आन्दोलन में मुजफ्फरनगर की भूमिका

      डॉ. सचिन कुमार
        एसोसिएट प्रोफेसर (इतिहास) डी0 ए0 वी0 कॉलेज, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)

शोध सारांश - मुजफ्फरनगर गंगा और यमुना के दोआब में मेरठ परिक्षत्र के दक्षिण व सहारनपुर के उत्तर में स्थित है इसकी सीमाएं बिजनौर व हरियाणा से भी मिलती है यह जिला अनेकों तहसीलों में विभक्त है।

   मुगल शासक शाहजहाँ ने सैयद नसिरूददीन को खिताब के रूप में अबुल मुजफ्फर की उपाधि व खातौली परगने के चालीस गाँव और दस हजार बीधा जमीन ईनाम में दी । आगे चलकर इसी खिताब के ऊपर इस शहर का नाम मुजफ्फरनगर पड़ा।

   मुजफ्फरनगर के प्राचीन इतिहास के विषय में प्रामाणिकता का अभाव सा दिखता था।  परन्तु जिस समय यह शोध पत्र लिखा जा रहा है उससे पूर्व के दशक में मुजफ्फरनगर शहर के पश्चिम स्थित माँडी गांव में एक किसान के खेत से कुछ सोने के आभूषण व मिटटी के बर्तनों के अवशेष मिले । जब इन अवशेषों का भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा परीक्षण किया गया तो इनकी तिथि हडप्पा सभ्यता तक जाती है। इसके अतिरिक्त यहां से कुषाणकालीन सिक्के प्राप्त हुए है

    इस शहर ने मुगल काल से लेकर आजादी की पहली किरण तक के सफर को अपने अन्दर समाया हुआ है। और देखा है कैसे वहसी अंग्रेज अधिकारियों के बगलों को नष्ट किया गया है व कैसे सरकारी खजाने को लूटा गया है । इसके अतिरिक्त समय-समय पर गांधीजी द्वारा चलाये गये आन्दोलनों में भी इस शहर अपनी सहभागिता की। नमक आन्दोलन में तो यहां कि जनता ने बढ-चढकर हिस्सेदारी की इनमें महिला पुरुष दोनों ही शामिल थे।   

शब्द कुंजी-मेरठ, क्रान्ति, नमक आन्दोलन, गांधीजी।