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January to March 2026 Article ID: NSS9664 Impact Factor:8.05 Cite Score:195 Download: 15 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9664 View PDf
महाराजा बलवंत सिंह और बनारस में उनका योगदान
चंद्रकेश पटेल
शोध छात्र, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ (उ.प्र.)प्रो.ज्योति साह
शोध निर्देशिका, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग, डॉ. अम्बेडकर राजकीय पी०जी० कॉलेज, ऊंचाहार, रायबरेली (उ.प्र.)
शोध सारांश- भारतीय
इतिहास में अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुती दी है। लेकिन इतिहास में कुछ
वीरों का योगदान अद्वितीय रहा हैं।उन्हीं में से एक थे-महाराजा बलवन्त सिंह। ये
1740 से 1770 ईस्वी तक अवध के अधीन बनारस के जमींदार थे। बनारस में इनका योगदान
भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इन्होंने 18वीं शताब्दी में बनारस
राज्य को मज़बूत और स्वतंत्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने
साहस और बलिदान से बनारस राज्य के विस्तार में अपना योगदान दिया। और बनारस में
अपना एक विस्तृत राज्य स्थापित किया।इसके अलावा उनके राज्य में विद्वानों का
आदर,सत्कार एवं सूफ़ी सन्तों का सम्मान होता था। इस लेख के माध्यम से महाराजा
बलवन्त सिंह और बनारस में उनका क्या योगदान रहा,का विस्तृत एवं तार्किक अध्ययन
किया जायेगा।यह लेख मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों के विश्लेषण पर आधारित हैं। इसमें
विश्लेषणात्मक,गुणात्मक एवं संरचनात्मक खोज पद्धति का प्रयोग किया गया है।
शब्द कुंजी-नवाब, अवध, अंग्रेज, जमींदार।
