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July to September 2025 Article ID: NSS9668 Impact Factor:8.05 Cite Score:68 Download: 6 DOI: https://doi.org/ View PDf
इंदौर जिले के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की उच्च शिक्षा ऋण योजनाओं की पुर्नभुगतान प्रवृत्तियों का तुलनात्मक अध्ययन
डॉ. जी.एल. खांगोड़े
सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. माधव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)रीना तिवारी
शोधार्थी, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. माधव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय,उज्जैन (म.प्र.)
शोध सारांश- उच्च शिक्षा
ऋण योजनाएँ विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने में वित्तीय सहयोग प्रदान करती हैं,
परंतु इन ऋणों का पुर्नभुगतान विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में इंदौर जिले के पाँच प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकोंकृस्टेट
बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक-की
शिक्षा ऋण योजनाओं की पुर्नभुगतान प्रवृत्तियों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।
शोध का उद्देश्य
यह जानना है कि विद्यार्थियों ने ऋण की किस्तों का भुगतान किस प्रकार किया, समय पर
पुर्नभुगतान की दर क्या रही, विलंबित भुगतान की स्थिति कितनी रही और किन सामाजिक-आर्थिक
कारकों ने पुर्नभुगतान को प्रभावित किया। अध्ययन में 500 विद्यार्थियों का नमूना लिया
गया, जिनसे प्रश्नावली और साक्षात्कार के माध्यम से आँकड़े संकलित किए गए।
इस अध्ययन
से यह निष्कर्ष निकलता है कि पुर्नभुगतान प्रवृत्तियाँ विद्यार्थियों की आय, रोजगार
स्थिति और ब्याज दरों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। नीति-निर्माताओं और बैंकों को आय-आधारित
पुर्नभुगतान मॉडल अपनाने की आवश्यकता है, जिससे विद्यार्थियों की वित्तीय कठिनाइयाँ
कम हों और शिक्षा ऋण योजनाएँ अधिक प्रभावी बन सकें।
शब्द कुंजी-शिक्षा ऋण पुर्नभुगतान, सार्वजनिक
क्षेत्र के बैंक, इंदौर जिला, तुलनात्मक अध्ययन, विद्यार्थियों की आय, रोजगार स्थिति,
वित्तीय कठिनाइयाँ, आय-आधारित पुर्नभुगतान मॉडल।
