• January to March 2026 Article ID: NSS9674 Impact Factor:8.05 Cite Score:170 Download: 15 DOI: https://doi.org/ View PDf

    वैदिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा में समवय: वर्तमान की आवश्यकता

      नीलेश सिंह
        सहायक प्राध्यापक (इतिहास) शासकीय महाविद्यालय, खुरई (म.प्र.)
      डॉ. मुक्ता मिश्रा
        प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (इतिहास) महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर (म.प्र.)

शोध सारांश- वर्तमान समय चारों ओर चुनौतियां प्रस्तुत कर रहा है। मनुष्य ने अपनी प्रारंभिक अवस्था से चलकर संस्कृति का निर्माण करते हुए एक सुविकसित सभ्यता को प्राप्त किया है। आज वर्तमान युग में मानव ने जिस सभ्यता को विकसित किया है उसका मूल उद्वेश्य भौतिक उपकरणों का विकास कर जीवन को सरल बनाना और अधिकाधिक शारीरिक सुखों की पूर्ति करना है। सभ्यता के इस विकास का मुख्य आधार आधुनिक शिक्षा  को माना जाता है। यदि यह कहा जाये कि आधुनिक शिक्षा  ही वर्तमान सभ्यता की वाहक है तो अतिश्योक्ति ना होगी। जिस प्रकार न्युटन ने अपने तृतीय नियम “क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया’’ में अपने विचार व्यक्त किये हैं उसी प्रकार वर्तमान आधुनिक शिक्षा  आधारित उपकरण परम्परा ने मनुष्य के बाहरी सुखों में इस तरह वृद्वि की है कि उसका आंतरिक विकास अवरूद्व हो गया है। आज विकास के विकार मनुष्य के अंतर मन से बाहर निकलकर भौतिक जीवन को प्रभावित करने लगे हैं। आज आधुनिक शिक्षा  आधारित वैज्ञानिक विकास ही वास्तविक विकास की एक पक्षीय अवधारणा के परिणाम फलीभूत होने लगे हैं। वर्तमान में मानव जाति के साथ-साथ संपूर्ण जीव-जगत् के समक्ष अनेक चुनौतियां उपस्थ्तिि हैं। जैसे-युद्व, पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य समस्याएं, जलवायु परिवर्तन, मानसिक तनाव, सांस्कृतिक क्षरण, नैतिक पतन, प्रजातीय विलुप्तीकरण आदि।

 ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी हैवाक्य के भाव को चरितार्थ कर आज मनुष्य के बाह्रय और आंतरिक पक्ष को संन्तुलित करना आवश्यक है अर्थात भौतिक और नैतिक जीवन के मध्य समंजस्य ही सतत् विकास की कुंजी है। इस हेतु हमें स्वामी दयानंद सरस्वती के कथन ‘‘वेदों की ओर लौटो‘‘ के महत्व को समझकर हमारी प्राचीन वैदिक शिक्षा  में उपरोक्त समस्या का हल तलाशना होगा। जहाॅं वैदिक शिक्षा  आधुनिक शिक्षा  का मूल आधार है, वहीं इसका मुख्य विषय इंद्रिय नियंत्रण, आत्म अनुशासन, परोपकार, दया जैसे नैतिकता से परिपूर्ण हैं जो भारतीयों की ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ एवं ‘‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’’ की भावना को अनुप्रमाणित करते हैं। वैदिक शिक्षा  मनुष्य के आंतरिक पक्ष को सबल बनाकर नैतिक मूल्यों को विकसित करने में सहायक है। इस प्रकार 21वी सदी में पश्चिम का विज्ञान ;आधुनिक शिक्षा ) और पूर्व का आध्यात्म ;वैदिक शिक्षा द्ध समन्वित होकर संतुलित व समयानुकूलित जीवन का विकल्प प्रस्तुत कर सकेेंगेेे।

शब्द कुंजी- वैदिक शिक्षा, आधुनिक शिक्षा, भौतिक पक्ष, आध्यात्मिक, नैतिक मूल्य, समन्वय, संस्कार, गुरु-शिष्य, संतुलन, शिक्षा  प्रणाली।