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January to March 2026 Article ID: NSS9682 Impact Factor:8.05 Cite Score:134 Download: 12 DOI: https://doi.org/ View PDf
आम्बेडकर के श्रम कल्याण सम्बंधी विचारों का अध्ययन
श्रीमती चित्रमाला भिमटे
सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय जे.एस.टी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालाघाट (म.प्र.)
प्रस्तावना- आधुनिक युग
में समाज एवं श्रम के क्षेत्र में
श्रमिकों का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और समाज में अनेक संस्थाओं के कार्यों की सक्षमता श्रमिको में कार्य करने
की क्षमता पर ही निर्भर हो गई है । श्रमिक समाजरुपी रथ की धुरी के समान है, जीवन एवं विकास
के किसी भी क्षेत्र में श्रमिक के अस्तित्व को इन्कार नहीं किया जा सकता । दुसरे
शब्दों में श्रमिक समाज के सच्चे
विश्वकर्मा होते है, जिनके परिश्रम के बल से ही पेट में पलने वाले शिशु से लेकर
कब्र में पांव लटकाये मानव का भरण-पोषण एवं संरक्षण होता है। किन्तु
यह भारतीय अर्थव्यवस्था की दुर्भाग्यपूर्ण
विडम्बना रही है कि यहाँ श्रमिकों की उपेक्षा की जाती है,
जो कि उत्पादन के महत्वपूर्ण साधन है, जिसका कुप्रभाव
राष्ट्रीय उत्पादन रखे आय पर पड़ता है। इन्हीं श्रमिका के सर्वांगीण विकास के लिए
महान मनीषी डॉ. अम्बेडकर ने अथक प्रयास किये ।
