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January to March 2026 Article ID: NSS9683 Impact Factor:8.05 Cite Score:124 Download: 10 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9683 View PDf
थारू जनजाति की आर्थिक एवं परपम्परागत जीवन शैली
राजकुमारी
शोध छात्रा, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ (उ.प्र.)प्रो. ज्योति शाह
शोध पर्यवेक्षक, डॉ. अम्बेडकर राजकीय स्नाकोत्तर कालेज, ऊँचाहार, रायबरेली (उ.प्र.)
शोध सारांश- थारू जनजाति
उत्तर भारत की प्रमुख जनजातियों में से एक है, जो मुख्यता तराई क्षेत्र विशेषकर उत्तर
प्रदेश के बहराइच, खीरी और नेपाल की सीमा से लगे क्षेत्रो में निवास करती है। इनका
आर्थिक जीवन प्राकृतिक संसाधनों और परंपरागत जीवन-शैली पर आधारित है। थारु समाज को
आजीविका प्रमुख साधन कृषि है, जिसमे धान, गेहूं, गन्ना और सब्जियों की खेती प्रमुख
है। महिलाऐं कृषि कार्याे में सामान रूप से भाग लेती है। पशुपालन मछली पकड़ना, शिकार
करना तथा कुटीर उद्योग आदि इनके प्रमुख आर्थिक स्रोत है। पारम्परिक रूप से ये आत्मनिर्भर
रहे है किन्तु आधुनिक समय में इनकी आर्थिक सरंचना में बदलाव आया है। शिक्षा एवं सरकारी
योजनाओं के कारण आज थारु समाज धीरे-धीरे आधुनिक व्यवसाय और सेवाक्षेत्र की ओर अग्रसर
हो रहा है, फिर भी गरीबी, भूमिहीनता, अशिक्षा और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ विकास
में बाधक बनी हुयी है। यह अध्ययन थारु जनजाति के आर्थिक जीवन की परंपरागत संरचना परिवर्तन
एवम् चुनौतियों को समझने का प्रयास है।
शब्द कुंजी-कृषि, पशुपालन, आजीविका, श्रम, मछली
पकड़ना कुटीर उद्योग।
