• January to March 2026 Article ID: NSS9688 Impact Factor:8.05 Cite Score:96 Download: 9 DOI: https://doi.org/ View PDf

    कथा संग्रह ‘इक्षुगन्धा में संकलित ‘सुखशयितप्रच्छिका’ की सामाजिक समस्याएं एवं समाधान

      रंजीत कुमार वर्मा
        शोधार्थी (संस्कृत) जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर (म.प्र.)

शोध सारांश-  आधुनिक समाज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि नवयुवक शिक्षित होते हुए भी बेरोजगारी का दंश झेलता है फिर भी वह समाज में रहकर विभिन्न प्रकार की सामाजिक यातनाओं को सहने करते हुए, और लोगों के द्वारा कहे गये ताने आदि को सुनकर बेरोजगार व्यक्ति व्यथित हो जाता है जिस कारण से वह समाज में रहकर सामाजिक कार्यों को अच्छे ढ़ंग से करने में सक्षम नहीं हो पाता है फिर भी वह समाज में रहकर अपने आप को असहाय, किंकर्तव्यविमूढ़ एवं बेकार समझने लगता है इसी को आधार बनाकर आधुनिक कथाकार अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने इक्षुगन्धा कथा संग्रह में शिक्षित नव युवक की सामाजिक परिस्थितियों का साहित्य के रूप में विभिन्न विधाओं में वर्णन किया है जिनके रूप इस प्रकार है- कथा, नाटक, काव्य, एकांकी, महाकाव्य आदि में सामाजिक समस्याओं का वर्णन वर्तमान समाज में प्रस्तुत किया है। इस प्रकार सामाजिक समस्याओं से ओत-प्रोत संस्कृत की आधुनिक कथाओं में समाज का बिम्ब - प्रतिबिम्ब रूप दिखायी दे रहा है।

            आधुनिक कथाकार अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने बेेरोजगारी से पीड़ित व्यक्तियों को कथा का आधार बनाकर समाज में उनकी विषम परिस्थितियों को दिखाने का प्रयास किया है जिसमें अभिराज राजेन्द्र मिश्र द्वारा रचित इक्षुगन्धा कथा संग्रह में संकलित ‘सुखशयितप्रच्छिका की सामाजिक समस्या एवं समाधान को लेकर समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है जिसमें कथा नायक के रूप में समीर शुक्ला निवासी गोण्डा जिला की कुँवानी नदी के समीप गाँव का रहने वाला एक नवयुवक है जिसके पिता की मृत्यु बचपन में हो गयी थी। वह बेराजगारी, असहाय होकर रोजगार के लिये इलाहाबाद शहर में आता है किन्तु कुछ समय के बाद वह दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है जिससे वह अस्पताल में पहुँचाया जाता है यह जानकर समीर शुक्ला स्वयं अपनी माता के विषय में सोचता है कि इस घटना की सूचना माँ को दे या न दे क्योंकि समीर शुक्ला पहले से ही बेरोजगारी की समस्या से ग्रसित था। जिस समस्या का समाधान एक वृद्ध रिटायर्ड फौजी एवं उनकी अत्यन्त सुन्दरी नतिनी शुभदा के द्वारा होती है जो इस कथा में नायिका के रूप में दिखलायी गयी है अंत में समीर और शुभदा का विवाह कर शिक्षित नवयुवक की बेरोजगारी को समाप्त करके समाज के सामने समाधान प्रस्तुत किया गया है।

शब्द कुंजी-बेरोजगारी, सामाजिक यातनाएं, असहाय किंकर्तव्यविमूढ़, विषम परिस्थितियाँ, सुखशयितप्रच्छिका, दुर्घटनाग्रस्त, रिटायर्ड फौजी, व्यथित, ओत-प्रोत।