• July to September 2025 Article ID: NSS9689 Impact Factor:8.05 Cite Score:49 Download: 3 DOI: https://doi.org/ View PDf

    बस्तर में शैव संप्रदाय का आस्थागत प्रवाह

      डॉ. वर्षा सूर्यवंशी
        संविदा सहायक प्राध्यापक (इतिहास) डॉ. खूबचंद बघेल शा. पी.जी. महाविद्यालय, भिलाई-3 (छ.ग.)

शोध सारांश- बस्तर में आस्थागत प्रवाह का ऐतिहासिक अध्ययन करते हुए यह स्पष्ट हुआ कि यह क्षेत्र भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं दार्शनिक विविधता का सजीव प्रतीक है। यहाँ की आस्थाएँ केवल किसी एक मत या संप्रदाय पर आधारित नहीं रहीं बल्कि समय के साथ विभिन्न धर्मों, उपासना-पद्धतियों एवं लोक परंपराओं के संगम से विकसित हुईं। इस अध्ययन के अंतर्गत बस्तर की आदिम संस्कृति में शैव, वैष्णव, शाक्त, जैन एवं बौद्ध संप्रदायों के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। साथ ही यह भी देखा गया कि इन सबका सम्मिलित प्रभाव यहाँ की लोकधर्मीय जीवनशैली, कला, स्थापत्य, भाषा एवं सामाजिक व्यवहार में किस प्रकार परिलक्षित होता है।

शब्द कुंजी-आस्थागत, शैव, वैष्णव, शाक्त, जैन, बौद्ध, लोकधर्मी, जीवनशैली, कला, स्थापत्य, भाषा।