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January to March 2026 Article ID: NSS9691 Impact Factor:8.05 Cite Score:105 Download: 7 DOI: https://doi.org/ View PDf
छत्तीसगढ़ में प्रचलित वैवाहिक रस्म विधान
डॉ. वर्षा सूर्यवंशी
संविदा सहायक प्राध्यापक (इतिहास) डॉ. खूबचंद बघेल शा. पी.जी. महाविद्यालय, भिलाई-3 (छ.ग.)
प्रस्तावना- ‘विवाह’ वेदोक्त सोलह संस्कारों में
सम्मिलित एक प्रमुखतम संस्कार है, जिसे विभिन्न नाम दिए गए हैं, इनमें से कुछ हैं,
पाणिग्रहण, विवाहोत्सव, परिणय, शादी, ब्याह, गठबंधन इत्यादि। वैदिक विवाह की पद्धति
से परम्परानुसार धर्म के मार्ग द्वारा गृहस्थ आश्रम में प्रवेश किया जाता है। श्रुति
का वचन है - विवाह में दो शरीर, दो मन, बुद्धि, हृदय, प्राण, आत्माओं का समन्वय कर
के अगाध प्रेम के व्रत को पालन करने वाले दंपत्ति उमा-महेश्वर सम प्रेम के आदर्श को
धारण करते हैं। वैदिक संस्कृति में विवाह एक पवित्र धार्मिक संस्कार है जो एक यज्ञ
है। इसमें दो प्राणी या जातक वर और वधू के रूप में अपने पृथक अस्तित्वों के स्थान पर
एक सम्मिलित, एकीकृत इकाई निर्मित करते हैं।
