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January to March 2026 Article ID: NSS9695 Impact Factor:8.05 Cite Score:98 Download: 6 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9695 View PDf
प्रमुख लोक वाद्य यंत्र
सतीश कुमार
शोधार्थी, संगीत (गायन), संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (उ.प्र.)डॉ. ज्योति मिश्रा
असिस्टेंट प्रोफेसर (शोध निर्देशिका) संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज (उ.प्र.)
शोध सारांश- जैसा कि हम जानते हैं, संगीतोपयोगि
ध्वनि को नाद कहते हैं। और इस नाद की उत्पत्ति होती है,विभिन्न वाद्य यंत्रों से, वाद्यों
की उत्पत्ति के विषय में बात करे तो हमारी सभ्यता संस्कृति में प्राचीन काल से ही वाद्य
यंत्रों का प्रयोग किया जाता रहा हैं, संगीत गायन, वादन और नृत्य तीनों के सम्मिलित
रूप को कहते हैं।अतः जितना महत्व संगीत में गायन अथवा नृत्य का हैं उतना ही महत्व वादन
का भी हैं।
शब्द कुंजी-वाद्य यंत्र, घन वाद्य,
तत् वाद्य, सुषिर वाद्य, अवनद्ध वाद्य।
