• January to March 2026 Article ID: NSS9699 Impact Factor:8.05 Cite Score:133 Download: 6 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9699 View PDf

    वैदिक सनातन परम्परा के 16 संस्कारो का अध्ययन

      मनीष कुमार देवांगन
        अतिथि व्याख्याता (इतिहास) शासकीय महाविद्यालय, रामचन्द्रपुर, जिला - बलरामपुर - रामानुजगंज (छ.ग.)

शोध सारांश-  सनातन धर्म जितना प्राचीन है उतना ही वैज्ञानिक भी प्राचीन भारत में अनेक महान ऋषि  हुए जिन्होने सनातन धर्म को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने का प्रयास किया । प्राचीन भारत में मानव जीवन को 100 वर्ष की आयु मानकर इसे 4 आश्रमो में - ब्रम्हचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ,  और सन्यास आश्रमो में विभक्त कर दिया गया, और प्रत्येक आश्रम का मानव जीवन में विशेष महत्व था, इसी क्रम में पंच महायज्ञो की व्यवस्था भी धार्मिक जीवन में की गयी। पुरातन से ही भारतवर्ष का प्रमुख धर्म सनातन धर्म रहा है जो इस धर्म की प्राचीनता और और विशालता को बताता है, इसी पुरातन भारतीय धर्म में 16 संस्कारो के महत्व को भी बताया गया है, प्रारंभ में संस्कारो की संख्या चालीस थी लेकिन समय के बदलाव और लोगो की दिनचर्या में बढती व्यस्तता के कारण कई संस्कार धीरे-धीरे समाप्त होते चले गये, स्मृति ग्रंथ गौतम स्मृति में संस्कारो की संख्या 40 मानी गयी थी। महर्षि अंगिरा ने संस्कारो की संख्या 25 बतलाई, सर्वप्रथम 16 संस्कारो का वर्णन व्यास स्मृति में किया गया एवं धर्मशास्त्रों के अनुसार भी संस्कारों की संख्या 16 निश्चित की गयी। जो मानव जीवन के जन्म से मृत्य तक सतत् चलने वाली प्रक्रिया है।

शब्द कुंजी - जीवन, संस्कार, सनातन धर्म, प्राचीन, पुरातन, ऋषि, आश्रम, अंत्येष्टि, शुभारंभ, लुप्त, मोक्ष।