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January to March 2026 Article ID: NSS9707 Impact Factor:8.05 Cite Score:65 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
चित्तौड़गढ़ दुर्ग का चक्रस्वामिन मंदिर
शंकरबाई मीना
शोधार्थी (इतिहास) संगम विश्वविद्यालय, भीलवाड़ा (राज.)
शोध सारांश-इस लेख में
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में अवस्थित विजयस्तम्भ के समीप पश्चिमाभिमुखी चक्रस्वामिन विष्णु
मंदिर के स्थापत्य तथा मूर्तिकला के बारे में शोध किया गया है, जो शास्त्रीय दृष्टिकोण
से अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। मंदिर योजना में एक तारे की आकृति का है, जो चक्र के समान
है, इसलिए इस मंदिर को चक्रस्वामिन मंदिर नाम दिया गया है। स्थापत्य की दृष्टि से इसे
तलछन्द व उध्र्वछन्द में बांटा जा सकता है। मंदिर वर्तमान में खण्डितावस्था में है,
जिसमें गर्भगृह का उत्तर तथा पूर्वी भाग शेष है, तथा पश्चिमाभिमुखी इस मंदिर का अलंकृत
प्रवेशद्वार है, जिसमें ललाटबिम्ब व उत्तरंग भाग भग्नावस्था में किन्तु उदुम्बर व द्वारशाखाएं
स्थापत्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जंघा भाग की प्रतिमाओं में भगवान विष्णु के व्यूहों
की मूर्तियों के होनें से यह मंदिर वैष्णव धर्म से संबंधित माना गया है। मंदिर के गर्भगृह
प्रवेशद्वार के बांयी ओर एक अभिलेख से इस मंदिर की ऐतिहासिकता सिद्ध होती है।
शब्द कुंजी–चक्रस्वामिन
मंदिर, तलछन्द, उध्र्वछन्द, उदुम्बर, ललाटबिम्ब, द्वारशाखाएं, जंघा, वेदीबंध, व्यूह,
अभिलेख।
