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January to March 2026 Article ID: NSS9710 Impact Factor:8.05 Cite Score:43 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
जी.एस.टी. कर संरचना: भविष्य में सुधार संभावनाओं का विवेचनात्मक अध्ययन
श्रीमती नीलम खासकलम
वरिष्ठ व्याख्याता (मॉर्डन ऑफिस मैनेजमेंट) इंदिरा गांधी शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)
शोध सारांश - भारत में वस्तु एवं सेवा
कर एक व्यापक बहुचरणीय, गंतव्य व उपभोग आधारित कर है जो प्रत्येक मूल्य वर्धन पर लगाया
जाता है। विश्व में जीएसटी कर प्रणाली सर्वप्रथम वर्ष 1954 में फ्रांस द्वारा लागू
किया गया। भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू जीएसटी एक देश, एक कर और एक बाजार की अवधारणा
पर आधारित है। पिछली कर व्यवस्था के तहत मौजूद 17 टैक्स और 13 उपकरों को एकीकृत करके
जीएसटी में समाहित कर दिया गया। अपनी प्रारम्भिक रूकावटों के बाद अब यह कर व्यवस्था,
परिपक्वता एवं व्यापक सुधारों के साथ GST 2.0 के रूप में परिलक्षित हो रही है।
टैक्स इन्वॉइस, रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइल करते समय पोर्टल
पर प्रदर्शित अवरोधों के कारण आवश्यक औपचारिकताएँ समय पर पूर्ण नहीं हो सकी। कर संग्रहण
की जटिलता, आम उपभोक्ताओं पर कर की अधिकता को कम करने के लिए GST 2.0 को सरलीकृत, सुधारात्मक,
अनुकूल संरचना के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो 22 सितम्बर 2025 से प्रभावी हुए है।
प्रस्तुत अध्ययन में जी.एस.टी कर संरचना का विश्लेषण किया गया है। भारत में वर्ष
1950 के बाद भारत के सबसे बड़े कराधान सुधार एवं जी एस टी के सुधारों की सम्भावनाओं
पर विचारात्मक अध्ययन किया गया है। कर संरचना में भविष्य में सुधार की सम्भावनाओं को
बताया गया है। इस शोधपत्र में मौजूदा साहित्य, इंटरनेट स्त्रोतों जिसमें विभिन्न लेखों,
शोधों, सरकारी रिर्पाेटों, समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, विभिन्न वेबसाइटों और इंटरनेटो
पर उपलब्ध सूचनाओं का उपयोग किया गया है।
शब्द कुंजी-जीएसटी कर संरचना, जीएसटी
2.0,सुधारात्मक उपाय।
