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January to March 2026 Article ID: NSS9713 Impact Factor:8.05 Cite Score:76 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
क्यारी सिंचाई पद्धति से कृषि उत्पादन पर प्रभाव एक भौगोलिक अध्ययन: हनुमानगढ़ के सन्दर्भ में
कमल कान्त
शोधार्थी,टांटिया विश्वविद्यालय, श्री गंगानगर (राज.)डॉ. धीरज कुमार यादव
सहायक आचार्य (भूगोल)टांटिया विश्वविद्यालय, श्री गंगानगर (राज.)
शोध सारांश- बढ़ती जनसंख्या के लिए भोजन, वस्त्र एवं मकान जुटाने के
लिए वृहद पैमाने पर संसाधनों का विदोहन हो रहा है। अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए
भूमि का इतना अधिक उपयोग किया जा रहा है कि उसकी उत्पादकता घटने लगी है। मनुष्य की
अनेक आर्थिक क्रियाओं के चलते वर्तमान में बढ़ती हुई जनसंख्या के जीवन स्तर को बनाये
रखने के लिए उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना आवश्यक है।
भूमि का सामथ्र्य व इससे प्राप्त होने
वाले लाभ एवं मानवीय आवश्यकताओं व उपयोग का अनुपात, मानव भूमि अनुपात कहलाता है। मानवीय
आवश्यकताओं की पूर्ति के सन्दर्भ में भूमि की क्षमता का एक निर्धारित स्तर होता है,
जबकि भूमि पर मानवीय संख्या घटती बढ़ती रहती है। भूमि की सामथ्र्य क्षमता का आकलन आंतरिक
संपोषण क्षमता एवं बाह्य संपोषण क्षमता के द्वारा कर सकते हैं।
निरन्तर जनसंख्या वृद्धि के साथ मानव भूमि
का अविवेकपूर्ण ढंग से उपयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ
आवासीय भूमि का विस्तार हो रहा है जिससे कृषि भूमि का क्षेत्रीय विस्तार संकुचित हो
रहा है। आज यह स्थिति उत्पन्न हो गई है कि पृथ्वी की सम्पूर्ण जनसंख्या को प्रर्याप्त
खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वैज्ञानिक उन्नति होने के पश्चात् भी जनसंख्या
की अनियंत्रित वृद्धि के कारण अनेक देशों में भूखमरी की समस्या दिन-प्रतिदिन बढती जा
रही है।
शोध
कुंजी
भोजन, वस्त्र, मकान, आर्थिक, क्रियाएं,
वर्तमान, बढ़ती, जनसंख्या, जीवन स्तर, वैज्ञानिक, उन्नति, भूखमरी, श्रेष्ठ, उपयोगिता,
भाखड़ा नांगल, इन्दिरा गांधी नहर परियोजना, सिद्धमुख नहर परियोजना, कपास, तिलहन, दलहन,
चावल, गेहूँ, परम्परागत, फसल, बाजरा, ग्वार, मोठ, ऋणात्मक, शस्य गहनता, कृषि उत्पादकता,
कृषि दक्षता, सेम, लवणता, क्षारीयता, ऊसरता आदि।
