• January to March 2026 Article ID: NSS9718 Impact Factor:8.05 Cite Score:76 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9718 View PDf

    गोविंद गुरु के नेतृत्व में भील आंदोलन : एक ऐतिहासिक अध्ययन

      रंजना चौहान
        शोधार्थी, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर (राज.)

शोध सारांश-  20 सी सदी के शुरुआती दौर में दक्षिण राजस्थान डूंगरपुर बांसवाड़ा और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुए भील आंदोलन (भगत आंदोलन) का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है l यह आंदोलन न केवल सामाजिक और धार्मिक सुधारो जैसे मांस मदिरा निषेध, शिक्षा का माध्यम था, बल्कि उन्होंने आदिवासियों को ब्रिटिश और रियायती दमन के खिलाफ एक राजनीतिक मंच सन 1843 में संप सभा के माध्यम से एकजुट किया l इस अध्ययन में 1913 के मानगढ़ नरसंहार की घटनाओं और आदिवासी इतिहास पर इनके दूरगामी प्रभाव की जांच की गई है l 19वीं सदी के अंत में राजस्थान के आदिवासी समुदाय अत्यधिक गरीब, कुरीतियां, जमीदारों के शोषण और ब्रिटिश रियासती बेगार प्रथा से त्रस्त थे l गोविंद गुरु ने 1858 से 1931, जिन्हें गुरु गोविंद गिरी के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने एक समाज सुधारक के रूप में आदिवासियों को जगाने का बीड़ा उठाया था l इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भीलो को सामाजिक रूप से शिक्षित करना, अंधविश्वासों से मुक्त करना और राजनीतिक रूप से जागरूक बनाना था l

शब्द कुंजी- दक्षिण राजस्थान, भील आंदोलन, ऐतिहासिक विश्लेषण, धार्मिक सुधार, ब्रिटिश और रियायती दमन, संप सभा, आदिवासी इतिहास, बेगार प्रथा, अंधविश्वासों से मुक्त l