• January to March 2026 Article ID: NSS9731 Impact Factor:8.05 Cite Score:51 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    राजस्थान के जनजातीय क्षेत्र में वंचित वर्ग के विद्यार्थियों क सन्दर्भ मेंशिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2011 के प्रावधानों के क्रियान्वयन के संबंध में प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों के प्रत्यक्षण का अध्ययन

      संगीता सुवालका
        शोधार्थी (शिक्षा संकाय) मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर(राज.)

शोध सारांश-  राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2011 के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के संदर्भ में। प्रस्तुत शोध का उद्देश्य प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों के प्रत्यक्षण का तुलनात्मक विश्लेषण करना है। अध्ययन में उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ़ जिलों के 40 प्रधानाध्यापकों एवं 80 शिक्षकों को उद्देश्यपूर्ण नमूना विधि से चयनित किया गया। आंकड़ों का संकलन स्व-निर्मित प्रश्नावली के माध्यम से किया गया तथा विश्लेषण के लिए प्रतिशत एवं काई-वर्ग परीक्षण का उपयोग किया गया।अध्ययन में नामांकन, अभिभावक सम्पर्क, शिक्षण-अधिगम व्यवस्था एवं अधिगम स्तर जैसे प्रमुख आयामों का विश्लेषण किया गया। परिणामों से ज्ञात हुआ कि नामांकन (χ²=24.46) एवं शिक्षण-अधिगम व्यवस्था (χ²=5.00) के संबंध में दोनों समूहों के प्रत्यक्षण में सार्थक अंतर पाया गया, जबकि अभिभावक सम्पर्क (χ²=1.96) एवं अधिगम स्तर (χ²=4.63) में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया। समग्र रूप से सभी आयामों में प्रत्यक्षण का स्तर “उच्च पाया गया, तथा शिक्षकों का दृष्टिकोण प्रधानाध्यापकों की अपेक्षा अधिक सकारात्मक पाया गया।अतः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जनजातीय क्षेत्र में वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के सन्दर्भ में RTE अधिनियम का क्रियान्वयन संतोषजनक है, किन्तु कुछ आयामों में सुधार की आवश्यकता है।

शब्द कुंजी-शिक्षा का अधिकार अधिनियम, नामांकन, अभिभावक सम्पर्क, शिक्षण-अधिगम व्यवस्था, अधिगम स्तर, प्रत्यक्षण।