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January to March 2025 Article ID: NSS9734 Impact Factor:8.05 Cite Score:12 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
घरेलू हिंसा समाप्ति में शिक्षा की भूमिका का एक समाशास्त्रीय विश्लेषण
डॉ. अनिता टॉक
सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) राजकीय कला महाविद्यालय, कोटा (राज.)
प्रस्तावना- भारतीय समाज एक पुरूष प्रधान
समाज है। यही कारण है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते तत्र देवता’की अवधारणा होते हुए भी व्यवहार में महिलाओं के स्वाभिमान
और उनके जीवन की आहुति दी जाती रही है। यही कारण है कि महिलाओं का उत्पीड़न, अपमान,
शोषण, दमन, तिरस्कार एवं यंत्रणा उतनी ही प्राचीन है जितना कि पारिवारिक जीवन का इतिहास।
हमारे देश में पति को पत्नी पर हाथ उठाने का अधिकार शादी के बाद ही मिल जाता है। इन्हीं
धारणाओं और मान्यताओं का परिणाम महिलाओं के विरूद्ध घरेलू हिंसा के रूप में देखने को
मिलता है।
