• January to March 2026 Article ID: NSS9740 Impact Factor:8.05 Cite Score:31 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    विद्यार्थियों की शरीर क्रिया घटक नाड़ी गति एवं लचीलापन पर आसन एवं प्राणायाम के होने वाले प्रभाव का अध्ययन

      डॉ. दिलीप सिंह चौहान
        सहायक आचार्य (शिक्षा) जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड– टू–बी) विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
      मनीष शर्मा
        पीएच.डी. शोधार्थी (शारीरिक शिक्षा) जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड–टू–बी) विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)

शोध सारांश- भारत ऋषि मुनि, योगी और दार्शनिको की धरती है । योग अपने पुराण उपनिषद, वेद और गीता में इसका समावेश योग विद्या धीरे धीरे विलुप्त होती जा रहीहै । मानव आज योग से दूर हो रहा है, और भोग की तरफ उन्मुख हो रहा है। जिससे मानव शारीरिक व मानसिक समस्या का सामना कर रहे है । प्रतिपादित ‘प्राणायाम’ तथा योग पूर्ण वैज्ञानिक पद्धति से असाध्य रोग से मुक्ति देने का कार्य योगाचार्य ने किया है ।

योग्य व्यक्तियों के द्वारा, प्राचीन, लाभदायक व्यायाम और योग साधना पद्धति का निर्माण कर भावी पीढ़ी को सुदृढ़, निरोगी, निकोप व संस्कारशील बनने में बड़ा योगदान है। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर शोधकर्ता ने 10 से 15 वर्ष के विद्यार्थियों को योगासन व प्राणायाम का प्रशिक्षण देकर आंकड़ों का एकत्रीकरण व तथ्यों का संकलन किया। विस्तृत विवरण का संकलन करके आंकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण से प्राप्त परिणामों के आधार निकले गए निष्कर्ष निम्न प्रकार से है। 

शब्द कुंजी-सर्किट प्रशिक्षण, प्लायोमेट्रिक प्रशिक्षण और मांसपेशियों की ताकत।