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January to March 2025 Article ID: NSS9742 Impact Factor:8.05 Cite Score:11 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
मेवाड़ की लोक-संस्कृति और सांस्कृतिक पहचान: संरक्षण की आवश्यकता और चुनौतियाँ
डिम्पल चावला
शोधार्थी (इतिहास) मेवाड़ विश्वविद्यालय, गंगरार, चित्तौड़गढ़ (राज.)डॉ. हेमेन्द्र सिंह सारंगदेवोत
सह आचार्य (इतिहास) मेवाड़ विश्वविद्यालय, गंगरार, चित्तौड़गढ़ (राज.)
शोध सारांश- मेवाड़ की
लोक संस्कृति और सांस्कृतिक पहचान की झलक यहाँ के स्थापत्य, साहित्य, लोक गीत, लोक
नृत्य, और यहाँ की ऐतिहासिक धरोहर में झलकती है। यहाँ की सांस्कृतिक विरासत मेवाड़
की कलात्मक सृजनता के साथ-साथ सामाजिक एकता और मूल्यों का भी प्रतिनिधित्व करती
है। पीढ़ी दर पीढ़ी जनसामान्य के जीवन में रच बसकर यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही
है। परंतु वर्तमान में वैश्वीकरण, तीव्र शहरीकरण और नई पीढ़ी में परंपराओं के
प्रति घटते लगाव के कारण इसके संरक्षण में चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं। वर्तमान में
इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह अमूल्य धरोहर विलुप्त होने के
खतरे में है।
शब्द कुंजी- मेवाड़, लोक-संस्कृति, सांस्कृतिक पहचान, संरक्षण,
परंपरा, लोकगीत, लोकनृत्य, गवरी, स्थापत्य
कला, चित्रकला, लोककथाएँ, सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन, शहरीकरण, वैश्वीकरण।
