• January to March 2024 Article ID: NSS9747 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    न्यायिक पुनरावलोकन का भारतीय संदर्भ में विश्लेषणात्मक अध्ययन

      डॉ. शोभा गौतम
        सह आचार्य (राजनीति विज्ञान) से. मु .मा .राजकीय कन्या महाविद्यालय, भीलवाड़ा (राज.)

शोध सारांश - न्यायिक पुनरावलोकन न्यायपालिका की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में न्यायपालिका की यह शक्ति और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है । न्यायपालिका को प्राप्त न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति न केवल नागरिकों के शासन व्यवस्था में विश्वास को बनाए रखने में सहायक है बल्कि सरकार के विभिन्न अंगों के मध्य संतुलन चक्र का भी काम करती है ।यह  संघात्मक व्यवस्था एवं नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा कर भारतीय संविधान के संरक्षण का कार्य करती है। प्रस्तुत शोध पत्र में सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय को प्राप्त न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति का मूल्यांकन किया गया है तथा अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति के साथ उसका तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। अनेक आलोचनाओं के उपरांत भी न्यायपालिका की यह शक्ति न्यायपालिका और शासन व्यवस्था में नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुई है। वर्तमान समय में न्यायपालिका को प्राप्त न्यायिक सक्रियता न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति का ही अग्रिम कदम है।

शब्द कुंजी-संघात्मक, संतुलन चक्र, न्यायिक सक्रियता मूल अधिकार।