• January to March 2026 Article ID: NSS9748 Impact Factor:8.05 Cite Score:33 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9748 View PDf

    ऊर्जा सुरक्षा और भारत-रूस संबंधः यूक्रेन युद्ध के बाद का विश्लेषण

      धीरज जायसवाल
        शोधार्थी, कोटा विश्वविद्यालय, कोटा (राज.)

प्रस्तावना- ऊर्जा सुरक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक स्थिरता, औद्योगिक विकास तथा रणनीतिक स्वायत्तता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार होती है। 21वीं सदी में ऊर्जा केवल आर्थिक संसाधन नहीं रही, बल्कि यह भू-राजनीतिक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का भी एक प्रमुख साधन बन चुकी है। भारत, जो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर करता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा उसकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाती है । तेजी से बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण भारत की ऊर्जा मांग निरंतर बढ़ रही है, जो भविष्य में और अधिक ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। इस संदर्भ में, वर्ष 2022 में प्रारंभ हुए रूस यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में अस्थिरता, कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव तथा ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता उत्पन्न हुई ।