• January to March 2026 Article ID: NSS9771 Impact Factor:8.05 Cite Score:62 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9771 View PDf

    अपना-अपना भाग्य कहानी में चित्रित यथार्थता

      निकिता बोहिदार
        अतिथि संकाय, सरकारी महिला महाविद्यालय, संबलपुर (ओडिशा)

प्रस्तावना-  जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित अपना-अपना भाग्य कहानी में गहरा यथार्थबोध निहित है। मनुष्य अपने सुख-दुख का कारण भाग्य को मानकर संतोष कर लेता है, जबकि वास्तविकता कर्म पर आधारित है। इसके माध्यम से लेखक उस स्वार्थी मानसिकता पर प्रहार करते हैं जो संपन्न वर्ग को निर्धनों की सहायता से विमुख करती है और यह उसका भाग्य है कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। कहानी में परिस्थितियों की विवशता और मानवीय संवेदनाओं के पतन का बिल्कुल सटीक यथार्थवोध है। अपना अपना भाग्य कहानी में पूर्ण रूप से यथार्थता को दिखाया गया है। कहानीकार जैनेंद्र कुमार ने समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता, वर्गभेद और सुविधा संपन्न लोगों की संवेदनहीनता का अत्यंत मार्मिक और वास्तविक चित्रण किया है। इस कहानी में समाज के उस वर्ग की पीड़ा के बारे में बताया गया है जो ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, जीना चाहते हैं लेकिन यह स्वार्थी समाज उनको अपने स्वार्थ सिद्ध के लिए इस्तेमाल करता है और उनके सुख-दुख से उनको कोई फर्क नहीं पडता।