• July to September 2025 Article ID: NSS9776 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    महाप्रभु चैतन्य के भक्ति-दर्शन का एक अध्ययन

      डॉ. राजीव मुखर्जी
        अतिथि व्याख्याता (दर्शनशास्त्र) शासकीय जे.योगनन्दम छतीसगढ़ महाविद्यालय,रायपुर (छ.ग.)

शोध सारांश-  भारतीय दार्शनिक परम्परा में भक्ति आंदोलन ने मध्यकालीन समाज को आध्यात्मिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक स्तर पर गहरे रूप से प्रभावित किया। इस आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तकों में चैतन्य महाप्रभु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भक्ति को केवल धार्मिक साधना न मानकर उसे प्रेम, आत्मसमर्पण तथा ईश्वरानुभूति का सर्वोच्च माध्यम माना। चैतन्य का भक्ति-दर्शन अचिन्त्य भेदाभेदसिद्धांत पर आधारित है, जिसमें जीव और ब्रह्म के मध्य भेद तथा अभेद दोनों की स्वीकृति है। उनका दर्शन वैष्णव भक्ति की परंपरा में एक नवीन चेतना का संचार करता है। प्रस्तुत शोध पत्र में महाप्रभु चैतन्य के जीवन, उनके दार्शनिक सिद्धांतों, भक्ति की अवधारणा, संकीर्तन आंदोलन तथा सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों का विशद अध्ययन किया गया है। साथ ही, उनके दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर भी विचार किया गया है।