• October to December 2025 Article ID: NSS9781 Impact Factor:8.05 Cite Score:9 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    उदयपुर जिले में सिंचाई स्रोतों एवं सिंचाई तीव्रता के परिदृश्य में कालिक परिवर्तन

      डॉ. संजय परिहार
        सहायक आचार्य (भूगोल) राजकीय महाविद्यालय, सिरोही (राज.)

शोध सारांश - सिंचाई कृषि विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ वर्षा अनिश्चित एवं असमान होती है। प्रस्तुत शोध में वर्ष 1966 से 2022 तक सिंचाई स्रोतों, शुद्ध सिंचित क्षेत्र, सकल सिंचित क्षेत्र तथा सिंचाई तीव्रता में हुए परिवर्तनों का अध्ययन किया गया है। यह शोध मुख्यतः द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति का उपयोग किया गया है।अध्ययन से स्पष्ट होता है कि प्रारंभिक दशकों में तालाब एवं पारंपरिक जल स्रोतों का सिंचाई में महत्वपूर्ण योगदान था, किन्तु समय के साथ इनका महत्व घटता गया। इसके विपरीत कुओं एवं नलकूप आधारित सिंचाई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे भू-जल आधारित सिंचाई पर निर्भरता बढ़ी है। नहर सिंचाई का विकास अपेक्षाकृत सीमित रहा। अध्ययन अवधि में शुद्ध एवं सकल सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई, जबकि सिंचाई तीव्रता में गिरावट देखी गई।हालांकि, भू-जल के अत्यधिक दोहन एवं पारंपरिक जल स्रोतों के घटते महत्व के कारण जल संसाधनों की स्थिरता एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही है। अतः उदयपुर जिले में सतत कृषि विकास हेतु जल संसाधनों का संतुलित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन आवश्यक है।

शब्द कुंजी-सिंचाई स्रोत, सिंचाई तीव्रता, शुद्ध सिंचित क्षेत्र, सकल सिंचित क्षेत्र औरभू-जल सिंचाई।