• January to March 2026 Article ID: NSS9782 Impact Factor:8.05 Cite Score:23 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    मेवाड़-वागड़ के प्रमुख संत और उनकी तपस्थली एवं सांस्कृतिक देन

      किरण सिंह
        शोधार्थी (इतिहास) संगम विश्वविद्यालय, भीलवाड़ा (राज.)

शोध सारांश- दक्षिणी राजस्थान का मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र भारतीय संत परंपरा, लोकधर्म, भक्ति आंदोलन, जैन साधना तथा आदिवासी सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल और आधुनिक युग तक यहाँ अनेक संत, सिद्धपुरुष, जैनाचार्य, वैष्णव भक्त तथा लोकदेवताओं ने समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की। इन संतों की तपस्थलियाँ, मंदिर, आश्रम और तीर्थ आज भी धार्मिक आस्था, लोकसंस्कृति तथा सामाजिक समरसता के प्रमुख केंद्र हैं। मेवाड़ की संत परंपरा में भक्ति, त्याग, राष्ट्ररक्षा और लोकमंगल का समन्वय दिखाई देता है, जबकि वागड़ क्षेत्र में आदिवासी जीवन, प्रकृति-पूजा और संतमत का विशिष्ट स्वरूप विकसित हुआ। इन संतों और उनके तीर्थस्थलों ने क्षेत्रीय भाषा, लोककला, संगीत, स्थापत्य, सामाजिक सुधार और धार्मिक सहिष्णुता को समृद्ध किया।

शब्द कुंजी-संत, मेवाड़,वागड़, भक्ति, योग, मीरा बाई, हारित, गुमान सिंह, चतुर सिंह, मावजी, गवरी बाई।